Saturday, October 17, 2015

रात

अधूरी नींद में
एक ख़्वाब से लिपटकर
मैं इस तरह रोया
कि जैसे फासला कोई
एक दूरी से बढ़कर
बाहों में गोया।

~ सूफी बेनाम





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