Thursday, February 2, 2017

गेम किस्मत अगर लगा जाये

वज़्न - 2122 1212 22
काफ़िया - आ (स्वर)
रदीफ़ - जाये

गेम किस्मत अगर लगा जाये
नोट हर दावं पे बदा जाये

शेर मुमकिन है जी सकें लेकिन
वस्ल इंसान से मिला जाये

ताश के खेल की जमे बाज़ी
शर्त ही आज कुछ जिता जाये

साथ को साथ संग चिंगारी
बिन तराशे न रात वफ़ा जाये

पैक में रंग सभी गुम इक्के हैं
साथ जोकर ही अब निभा जाये

कुर्ब है चाल हुस्न साज़िश है
होश खुशबू पे टूटता जाये

फेंटते रह गये शराफत से
हैण्ड को डैक अब रंगा जाये

मद के प्यासों को मद से तहमद
अब तो ख्वाब-ए-अता बुझा जाये

होनी तरतीब भी बनाती है
अक्ल ना हर जगह लगा जाये

जज़्ब ब्लाइंड का है ये बेनामी
बस तबीयत से बाँटता जाये

~ सूफ़ी बेनाम


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