Friday, November 25, 2016

थोड़ा गोलाई से

चट्टान को चट्टान की 
नोकीली पेचीदा
चढ़ाई पर धकेलना
वैसे ही है जैसे
ढलती हुई उम्र में
मोहब्बत निभाना 
और जैसे
सांसों के दरमियाँ ज़िंदा से
ज़िन्दगी समझना समझाना।

चट्टान को चट्टान की
चढ़ाई पर धकेलना
संभव है मगर 
आलिम कहते है
थोड़ा गोलाई से 
हौले-हौले।

~ सूफ़ी बेनाम


No comments:

Post a Comment

Please leave comments after you read my work. It helps.