Wednesday, February 18, 2015
कुछ दूर चले जाओ, ठहरो ना इस जगह...
कुछ दूर चले जाओ,
ठहरो ना इस जगह...
ज़रा बदल जाओ
ठहरो ना इस जगह
वरना कोई आएगा
औ तुमको बदल देगा।
पलट के ना देखो उसे
बार-बार, जो गुज़र गया
वो लम्हा-ए-इंसा है
मौसम की तरह ना लौटेगा।
ज़रा बदल जाओ
ठहरो ना इस तरह
वरना कोई आयेगा
औ तुम को कुचल देगा।
मेरे जूनून ने कई बार
संभाला मुझको
मेरे दोस्त, वो खैर-ख्वाह मेरे
बेदार - समझदार निकले।
ज़रा बदल जाओ
ठहरो ना इस जगह
वरना कोई आएगा
औ तुमको बदल देगा।
~ सूफी बेनाम
ठहरो ना इस जगह...
ज़रा बदल जाओ
ठहरो ना इस जगह
वरना कोई आएगा
औ तुमको बदल देगा।
पलट के ना देखो उसे
बार-बार, जो गुज़र गया
वो लम्हा-ए-इंसा है
मौसम की तरह ना लौटेगा।
ज़रा बदल जाओ
ठहरो ना इस तरह
वरना कोई आयेगा
औ तुम को कुचल देगा।
मेरे जूनून ने कई बार
संभाला मुझको
मेरे दोस्त, वो खैर-ख्वाह मेरे
बेदार - समझदार निकले।
ज़रा बदल जाओ
ठहरो ना इस जगह
वरना कोई आएगा
औ तुमको बदल देगा।
~ सूफी बेनाम
Wednesday, February 11, 2015
बेनियाज़
इंसानी बेकसी, तजरीबों की रच-बुन
आग में डूब के निकलना है, इस जहाँ से।
वो हुस्न बेशुमार ही क्या जो
उम्मीद में ख़लल न पैदा कर दे।
वो इश्क़ बेमिसाल ही क्यों जो
दिल जला कर छलनी न कर दे।
वो दोस्ती बेइन्तहां ही कैसी जो
सबसे प्यारी चीज़ न छीने ले।
इंसान को बेनियाज़ बनाती है दिल्लगी
दर्द-ए-चाहत से गुज़रा - अकेला तो हो।
~ सूफी बेनाम
बेनियाज़ - carefree.
आग में डूब के निकलना है, इस जहाँ से।
वो हुस्न बेशुमार ही क्या जो
उम्मीद में ख़लल न पैदा कर दे।
वो इश्क़ बेमिसाल ही क्यों जो
दिल जला कर छलनी न कर दे।
वो दोस्ती बेइन्तहां ही कैसी जो
सबसे प्यारी चीज़ न छीने ले।
इंसान को बेनियाज़ बनाती है दिल्लगी
दर्द-ए-चाहत से गुज़रा - अकेला तो हो।
~ सूफी बेनाम
बेनियाज़ - carefree.
Monday, January 19, 2015
Sunday, January 18, 2015
Sunday, January 4, 2015
........... नाम लिखा देखा है
........... नाम लिखा देखा है
एक ग़ज़ल की किताब पे
तुम्हारा नाम लिखा देखा है
न सही ज़िन्दगी के दरमियान
पर तुम्हारा ख़्वाब खिला देखा है।
बहुत हैं वाक़ियाँ छुपे ढके
इन कागज़ों के गिलाफ़ में
शायद सांसो से थमा नहीं
जो कई महफ़िलों का नसीब था।
होंगे कोरेपन पे गुंथे हुए
हसरतों के कारवां
थोड़ी अनसुनी, बेनियाज़ सी
तेरी ज़िन्दगी की दास्तां।
~ सूफी बेनाम
बेनियाज़ - carefree,
( I wrote this after reading the some works and life of Parveen Shakir)
एक ग़ज़ल की किताब पे
तुम्हारा नाम लिखा देखा है
न सही ज़िन्दगी के दरमियान
पर तुम्हारा ख़्वाब खिला देखा है।
बहुत हैं वाक़ियाँ छुपे ढके
इन कागज़ों के गिलाफ़ में
शायद सांसो से थमा नहीं
जो कई महफ़िलों का नसीब था।
होंगे कोरेपन पे गुंथे हुए
हसरतों के कारवां
थोड़ी अनसुनी, बेनियाज़ सी
तेरी ज़िन्दगी की दास्तां।
~ सूफी बेनाम
बेनियाज़ - carefree,
( I wrote this after reading the some works and life of Parveen Shakir)
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