Sunday, February 21, 2016

काजल /काजर

काजर लदे रातन के नैना
रच दिन, अब भी भारी हैं
सांसें ढाहिं जो लट में तेरी
तुर कानों में झूला डारी हैं

~ सूफी बेनाम


 





चेहरे



वो रेग सांसें जो चेहरों में सजकर

जिस्म में रूह को पनाह दे जाती है

जो अक्सर ही दिलों में टूट कर

उम्मीद-ए-नज़र रेग कर जाती हैं

इकसीर रेग के रेगिस्तान में खोकर

कुछ मिराज़ों पे फिर जाग जाती हैं।


~ सूफी बेनाम









इकसीर - alchemy

मेरा खालीपन देख किसको जगा देता है



मेरा खालीपन देख किसको जगा देता है

एक ये ज़ख्म जाने किसको हवा देता है


तुमको भूले ही थे लौट तुम आये फ़िरसे

घाव भरने की अब कौन सज़ा देता है

~ सूफी बेनाम





उड़ान



निज़ाम मोहब्बत बनी

आवाम रह गया इंसा

अश्कों की परवाज़ नापती

दिल का गहरा आसमां

सांसों को उड़ान की बेताबी

खोज चाहत की रही पशेमां

~ सूफ़ी बेनाम




रोज़ नामों तलक ढका पाया


रोज़ नामों तलक ढका पाया
हमने हर एक में खुदा पाया

क़ैस नहीं ज़िन्दगी रिज़ा पाया
इश्क़ को हमने बुलबुला पाया

हममे नफरत जगा रही सोना
रोज़ कागज़ ग़ज़ल-जला पाया

कोई रुकता नहीं है किस्मत पर
मील चलकर नया सिला पाया

हमने उम्मीद को शिफ़ा पाया
साथ लम्हा' कभी लिखा पाया
~ सूफी बेनाम








क़ैस - majnoo , रिज़ा - pleasure

निदा की शायराना सफर को समर्पित

बहुत नाप कर रही कहानी है यारो
ग़ज़ल एक छुपी ज़िंदगानी है यारो

यहाँ रोज़ मुश्त-ए-ख़ाक इन्सां सफर में
सुना फिर एक निदा झपकी है यारों

किताबों के पन्नों से स्याही में बहकर
निदा की नज़्म कान घुलती है यारों

निदा था सफर भरमें मिसरों में बुन-बुन
क्यों वक़्त की गिरह उलझी है यारों

न कुछ मिल सका और कह भी न पाया
मुलाकात गुज़री फ़िज़ा सी है यारों

निदा था अधर पर ग़ज़ल झूमता सा
फिदा रह गयी अब प्यासी है यारो
~ सूफी बेनाम









निदा - call / sound , फिदा - devotion, मुश्त-ए-ख़ाक - handful of dust (human being)

रात है परछाईयाँ

चाँद से जलकर दिखी है मुफ़लिसी चारों तरफ़
रंग-ए-रूह बद-रंग से सब पुश्ताह सी चारों तरफ़

रात है परछाईयाँ बिछ जायेंगी हर दीप तल
सर्द शामें जल रही है आशिकी चारों तरफ़

तन रहा तन पर लदा उर्यानियत हर मोड़ पर
फिर पाकीज़ा फ़िक्र जगकर अली चारों तरफ़

तुम से छू कर जल रहा अफ़कार भी फानूस बन
स्याह बन मश्कों में भरती तीरगी चारों तरफ़
~ सूफ़ी बेनाम









परतव - reflection, ज़िल्ल - shadow, मुफ़लिसी - poverty, पुश्ताह - pile/heap, उर्यानियत - nudity, पाकीज़ा - chaste, फ़िक्र - thought/ counsel, अली - high/exalted, फानूस - lantern, अफ़कार - meditation, तीरगी - darkness, मश्क़ - letter or creative work