मेरी रिज़ालत में गूंजते हैं
तेरी अकीबत को पूछते हैं
लफ्ज़ ओंठों पे रह गये जो
तन्हाई में फिर क्या ढूँढ़ते हैं
लौटे किस्मत से टकरा फिर
क्यों ठंडी दीवार पे गूंजते हैं
है सर-गर्मी दीवारों के पार
जहाँ अपने अपनों को चूमते हैं
तुमने दिखायी परदाज़ मुझको
कि इबादत असर आवारगी है
अब तल्ख़ मुझो है अक्स भी
ग़र्क़ जज़बात औ अधूरे चेहरे
अब ऐसी आदत पड़ी है तेरी
खुद से मतलब फ़क़त ढूँढ़ते हैं
~ सूफी बेनाम
तल्ख़ - distasteful
ग़र्क़ - sunk
रिज़ालत - lowness/worthlessness,
परदाज़ - adorn/perform,
तेरी अकीबत को पूछते हैं
लफ्ज़ ओंठों पे रह गये जो
तन्हाई में फिर क्या ढूँढ़ते हैं
लौटे किस्मत से टकरा फिर
क्यों ठंडी दीवार पे गूंजते हैं
है सर-गर्मी दीवारों के पार
जहाँ अपने अपनों को चूमते हैं
तुमने दिखायी परदाज़ मुझको
कि इबादत असर आवारगी है
अब तल्ख़ मुझो है अक्स भी
ग़र्क़ जज़बात औ अधूरे चेहरे
अब ऐसी आदत पड़ी है तेरी
खुद से मतलब फ़क़त ढूँढ़ते हैं
~ सूफी बेनाम
तल्ख़ - distasteful
ग़र्क़ - sunk
रिज़ालत - lowness/worthlessness,
परदाज़ - adorn/perform,



